हमारे देश के सामान्य व्यक्ति के लिए सुरक्षा की चिंता सरकार करती नहीं, वो चाहे बम्बं विस्फोट मे मारे जाये कोई बात नहीं परंतु हमारे माथे पे पडे ये राजकिय लोगो की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है.मै और आप बिना सुरक्षा रह सकते है परंतु ये राजकिय के नेता(यानी महाराजा) बिना सुरक्षा नहीं रह सकते है ईसीलिये अंदाजपत्र मे उनके लिए खास प्राथमिकता दी जाती है और ये चोर,लफंगे,लूटेरे यानी कामचोर नेताओ के लिये 2006-2007 में 132.41 करोड रुपिया का खर्च करने के लिये बाँटा गया था.
याने Special Protection Group के लिये जो केन्द्रीय प्रधानो की सुरक्षा करती है उनके लिये 132.41 करोड, ये है हमारे निर्धन भारत के धनवान नेता.
अब यही नेताओ के कहे के यदी आपको सुरक्षा चाहिऎ तो पैसा देना पडेगा तो ये सब नफ्फट हो कर कहेंगे “हमारे पास ईतना पैसा नहीं है और आप हमे सरकारी खर्च पर सुरक्षा प्रदान करो.
मेरे अपना शहर पोरबंदर वैसे छोटा है परंतु यहाँ भी मैने देखा के 27 सुरक्षा कर्मचारी तो राजकिय नेताओ की सुरक्षा मे लगे है उनमे से 4 व्यक्ति के पास तो कोई पद भी नहीं परंतु फिर भी उनको सुरक्षा प्रदान की गई है.
वैसे भी हमारे समाज में आज-कल सुरक्षा कर्मी (सरकार के खर्च पर) रखने की सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतिक बन गया है.
जिस मवाली और गुंडे को सुरक्षा कर्मी ने थाने मे लाकर पीटाई की हों और ये गुंडा चुनाव मे जीत कर आये और जिस सुरक्षा कर्मी ने उसकी पीटाई की थी उसी को उनका सुरक्षा करने के लिये नियुकत की जायें तो उस सुरक्षा कर्मी की परिस्थिती क्या होंगी ?
visit website : भारतीय अंदाज पत्र