dirty bee and sweet – गन्दी मखी और मिठाई

March 15, 2009

हमारा स्वाभिमान ईतना नीचे गिर गया है के जो हमारे शत्रु है एवं हमारे देश के ऊपर विश्वासघात करके हमला कर के हमारे सैनिको की हत्या करनेवाले पाकिस्तान के भूतपूर्व सरमुख्यतार मुशरफ को अपने देश मै बुला कर तंदूरी चिकन खिला कर और ईनकी नालायक बात सुनते है.
और ये काम भी किया है अपने कौ बौध्धिक कहलानेवाले दंभी लोगोने.

क्या अमेरिका या ईसराईल किसी संस्था ईरान के प्रमुख महमूद अहमनेजाद या वेनेजुला के प्रमुख चावेज को अपने देश मे निमंत्रण दे के ईनकी बात सुनेंगे और तालिया बजायेगें ?

परँतु हमारे देश मे सब कुछ हो सकता है कल ऎसा भी हो हम दाउद जैसे गुंडे को बुलायेंगे और ईनकी बाते पंचतारक होटेल के अंदर बैठ के आराम से सुनेंगे और भी कहेंगे हम महान है.

ईस देश मे बहनेवाली सुंदर वायु मँडल को 1000 वर्ष से दंभी हिन्दुओं ने प्रदुषित कर दिया है, मुशरफ जैसी मखी जो के हमेंशा गन्दे ढेर पै बैठनेवाली को हमारी नमकीन जैसी संस्थाये निमंत्रन दे कर, हमे जो मिठाईया खिलाई जाती है परंतु हमे ये नही पता के ईस मिठाईया खाने से हमारा स्वास्थ्य कितना बिगद जाता है, मुशरफ जैसी मखीया अपने पैर गन्दे ढेर से कई किटाणु भी लाती है और अंत हम पश्र्ताप होता है.

dark future hindus in india – अंधकारमय भविष्य हिन्दुओं के लिये.

December 28, 2008

मुंबई मै हमला हुआ और सारे देश मै एक ही प्रश्न हुआ के ये आंतकवादी घुस कैसे गये हमारे देश मे और चर्चा होने लगी के हमारी सुरक्षा व्यवस्था मे खामी है, अरे, भाई, जब मै 1994 मै बैग्लुर मै एन.आई.ऎस.(ऎथ्लेटीकस कोच) का अभ्यास कर रहा था तब हमारी साथ हरियाणा का रंजितसिंह था जो बी.ऎस.फ.(नाम बडा परंतु काम छोटा) नोकरी कर रहा था, उस ने मुझे बताया था के बांग्लादेश की सीमा से किस तरह  भ्रष्टचारी बी.ऎस.फ वाले 200 रुपिये मे बांग्लादेशी को घुसने देते थे तो ये हमारी जो सीमा है वो खुली पडी है, कोई भी व्यक्ति आराम से भारत मे घुस जाते है.
मै पोरबंदर का रहेनेवाला हुं और 1993 मे मुंबई मै जो बम्ब विस्फोट हुए, उसमे उपयोग RDX  पोरबंदर से ही उतारा गया था और उस में यहा के मुस्लीम सतार मौलाना और ममुमिया ने सहायता की थी और बाद में ईन सभी को पकडा गया था और जेल भी भेज दिया गया था परंतु हमारी न्यायालय की त्रुटि के कारण आज ये सभी छुट गये और सतार मौलाना तो यहां के मुसलमान का अब नेता भी बन गये है और भाजप और कौंग्रेस के नेता उनके कदमों को छुते है.
रही बात मुंबई की तो कोई टी.वी चेनलवाले ये नहीं बोलते के ये हमलावर ईस्लामीक त्रासवादी है जो के जब साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को पकडी गई तो यही दंभी मीडीयावाले जोर जोर से हिन्दु आंतकवादी जैसे विशेषण उपयोग करते थे.
NDTV  के दंभी ऎंकर ये बोलते थे के जब कमांडो ताज मै प्रवेश किया आंतकवादियो को मारने के लिये तो ये कमांडो “जय भवानी” ऎसे नारा लगाते थे. ईनका अर्थ ये के ईस देश में हिन्दुओं को अपने ईश्वर का भी नारा लगाने का अधिकार नही है.
और हमारे फिल्म के हिरो ‘जो दश व्यक्तिओ को अपने अकेले हाथ से विलनो को चीत करते है” वो भय के मारे अपने घर मै ही बैठे रहे और जब सभी त्रासवादी मारे गये तब ये बबुचक हाथ मै मोमबती लेके निकले, अर्थात हमारे समाज का वास्तविक हिरो कौन है ? फिल्म के हिरो या राजकिय नेता या सशस्त्र दल के सैनिक ?
आमीरखान,शबाना आजमी, जावेद अख्तर और तीस्ता शेतलवाड जैसे मानवाधिकारवाले मुंबई मे मृत्यु हुए व्यक्तिओं को न्याय दिलाने के लिये ईन ईस्लामीक त्रासवादी के विरुध्ध कोई अभ्यान शरु करेंगे ? गोधराकांड मे तो ईन दंभीओने बहुत उछ्ल-कुद कर सारे विश्व में कागरोल मचाई थी ?
अब रही दिपक चोपरा की जौ अमेरीका मै बैठ के बोलता है के “मुस्लीम पे अत्याचार हो रहे है ईसलिये ये हमले कर रहे है”.ये दिपक चोपरा जो योग को भी याने धर्म को भी बेचनेवाला(धर्म को बेचना ये अपनी माँ के बेचने बराबर है) ने कभी ईतिहास पढा है ? के ईस देश के हिन्दओं के ऊपर 1200 वर्ष से ईस्लाम ने अत्याचार किया है और आज भी ये कार्य चालु है और हिन्दुओ ने तो अपने धर्म को बचाने के लिये प्रतिरोध किया था, क्या हिन्दुओ को ईसका भी अधिकार नहीं ? यदि दिपक चोपरा की बात माने तो अमेरीका मै 9/11 हुआ ये भी क्या मुस्लीमों के उपर  अत्याचार के कारण हआ ? परंतु मी. दिपक चोपरा ईस देश के कायर हिन्दओ के विरुध्ध बोल सकते है टी.वी.. के उपर परंतु अमेरीका के विरुद्ध या 9/11 के तरफदारी मै नहीं बोंलेगे क्युं के उसे धारणा है के यदि वो बोलेंगे तो अमेरीका 24 घंटे मै उसको पकड कर जेल में भेज देगे.
याने हम हिन्दुओ को अब स्वीकार कर लेना चाहिये के हम कायर है और ईन राक्षसो को आहार बनते जायेंगे, क्युं के हम ना तो सर्ब है जो अपने बाप-दादा का वैर लेने के लिये बोस्नीया मै जो उसने किया वो कर सके और ना तो हम यहुदी है जो अपने शत्रुओं को ईस  तरह विश्व से नष्ट कर देते है के शत्रु दुसरी बार जन्म लेने से भी गभराते है. हा, हम है लालु, मुलायम,मायावती,अडवानी,सोनिया और करुणानिधि जो अपने ही लोगो को खा कर आराम से वर्तमान काल को ईश्वर की पदवी दे कर पुजनेवाले.
बोलो : जय कायर हिन्दु.

support india nuclear deal with usa – समर्थन भारत एवं अमेरीका अणु समजुती

August 30, 2007

भारत और अमेरीका के बीच अणु करार होना चाहिये या नहीं ईस बारे मे राजकिय पक्षो के बीच खेंचतान हो रही है, वैसे ईस करार से हमें लाभ है क्योंके ईससे हमें यांत्रिक जानकारी और भारी पानी जो अणु उत्पादन के लीये महत्व वस्तु है वो हम प्राप्त कर सकेंगे.
यदी हम कोई अणु परिक्षण करेंगे तो अमेरीका को पहले जानकारी देनी पडेगी या हम ईस करार का भंग करना चाहते है तो 1 वर्ष पहले बताना पडेगा.
अब बात आती है करार मे जो नियम है 123 कि तो ईसमें कोई ऎसी दुविधा नहीं है के हमारा ईस मे कोई गेरलाभ हो, और भविष्य में हमें बिजली कि जरुरत पडने वाली है तब हम बिजली कहाँ से उत्पन्न करेंगें ? क्या चाईना हमें देंगा ? आज भी चाईना हमारे सिक्कीम और अरुणाचल प्रदेश के उपर अपना दावा करता है और भविष्य में यदी चाईना ने हम पर हमला कर दिया तब अमेरीका एक ऎसा देश है जो हमारी सहायता करेंगा.
रही वामपंथी कि तो वे तो वैसे ही हिन्दु और देश विरोधी है जब हमारे पर चाईना ने हमल किया था तब ये हरामखोर वामपंथीओने चाईना को सहायता कर रहे थे और पोखरण में अणु परिक्षण किया गया तब भी ये नालायक साम्यवादीओने विरोध किया था और आज ये दभीं साम्यवादी राष्ट्रीय हित की बात करते है ?
हमारा अमेरीका के साथ 30 अबज डोलर का व्यापार है और चाईना का व्यापार अमेरीका के साथ 65 अबज डोलर का है और चाईना चाहता है के अमेरीका का व्यापार भारत से ना हो ईसीलिये ये देश-द्रोहि साम्यवादी चाईना के हाथ कि कठपुतली बनकर या चाईना को खुश करने के लिये अमेरीका का विरोध करते है.
रही बात भाजपा कि, हमारे देश कि राजकिय पक्षो की जो नौंटकी चलती रहेती है ईस में ये विदुषक के पात्र का अभिनय करती आयी है,आज-तक हिन्दुओं को मुर्ख बना बना कर मत प्राप्त करती रहीं और ये भी साम्यवादी की तरह हो गयी है.
दुर्जन मित्र से सज्जन शत्रु अच्छा है .
read news : india benefit nuclear deal with U.S.A.

अंगकोर वाट के पक्ष में मत दीजीये – give vote for Angkor wat

June 19, 2007

आज-कल विश्व के 7 अदभुत प्रतिको के लिये मत के लिए प्रचार किया जा रहा है और हमारा कम-भाग्य से हमारे जो हिन्दु धर्म की जो संस्थाये है उनको ये भी जानकारी नहीं है के ईस 7 अदभुत प्रतिको में सारे विश्व मे प्रसिध्ध “भगवान श्री विष्णु के मंदिर  अंगकोर वाट मंदिर” जो के कंम्बोडिया मे है वो  भी सामिल है. अंगकोर वाट मंदिर स्थापत्य एंव शिल्पकाम का एक अदभुत  प्रतिक विश्व में बन गया है और ये मंदिर पहाडो की चटानो को काटकर बनाया गया है.
मेरा अनुरोध है के आप सभी ईस अंगकोर वाट मंदिर को मत दे कर प्रथम स्थान के लिये विजेता करे. वैसे ये काम RSS और विश्व हिन्दु परिषद को करना चाहिये परंतु ये सभी का हिन्दुवाद तकवादी है.
अंगकोर वाट के पक्ष में चाईना, वियेतनाम, थाईलेंड और कंम्बोडिया के नागिरोकोने प्रचार और मत के लिये आंदोलन भी शरु कर दिया है और आज चाईना वोल के बाद अंगकोर वाट 2 दुसरे नंबर पर चल रहा है.

अंगकोर वाट मंदिर के लिये वेब साईट : http://www.new7wonders.com/index.php?id=409
कैसे मत दे ? :- आपका ई-मेईल का पंजीकरण करा के आप अपना मत दे 7 प्रतिको में और A confirmation email  के लिये अपना in box या Bulk mail में जा के chek करे और दी गई  link पर click  करे.
visit website vote for Angkor
: http://www.new7wonders.com/index.php?id=386

Informations Angkor wat Temple : http://www.angkor-cambodia.org/eng/angkor.html                                                                                                                           http://www.angkorwat.org/                                                                                                     http://en.wikipedia.org/wiki/Angkor_Watangkor wat

शिव सेना का आंतक – shiv sena terror

June 3, 2007

जवानी में उसने एक बार सागर मे पेशाब किया था,
और ईसी लिये,
सागर की सपाटी कितनी ऊंची आ गई है,
ये देखने के लिये,
अपना बाकी बचा आयुष्य,
खर्च कर डाला माँपने के लिये.
-विदां करंदीकर
कहते है के जो कायर होते है वौ दिखावा ज्यादा करते है, यही हाल शिव सेना के है, ओरकुट वेब साईट में किसीने बाला ठाकरे के विरुध कुछ लिख डाला किसीने तो ये शिव सेना के मवाली गुंडे सायबर काफे चलानेवालों के उप्रर तुट पडे.
ईसमें सायबर काफे वालों क्या अपराध ? लिखनेवाला कोई और सजा निर्दोष काफे मालिको को ? और ये शिव सेना वाले कहते है के ये लिखा गया पाकिस्तान से तो तो पाकिस्तान जा के लिखनेवालो की शोध करो और आप ठाकरे परिवार को भगवान समजते है तो पाकिस्तान जा के आत्मघाती हमला करो.
परंतु ये शिव सेना वाले कायर है, मुंबई में दाउद ईब्राहिम के गुंन्डे निर्दोष हिन्दु व्यापारी को परेशान करते है तब तुम्हारी बहादुरी कहाँ चली जाती है ? जब ईंकम टेक्ष वालों ने दाउद की मिल्क्त की बोली लगाई तब शिव सेना वालों ने ये मिल्क्त क्युं नहीं खरीदी ? कहां गई थी तुम्हारी बहादुरी ?
जब कोई हिन्दु देवी-देवता के बिभ्स्त और नग्न चित्र याँ मजाक करते है तब तो तुम दंगा नहीं करते ? क्या बाला ठाकरे भगवान से बडा है ?
में भी हिन्दु राष्ट्रवाद का समर्थक हुं परंतु ये जो शिव सेना का हिन्दुवाद है वो घटिया प्रकार का है. ऎसा हिन्दुवाद नहीं चाहिये हमें जहाँ मवाली और गुंन्डापन हो.
शिव सेना और बंजरग दल जैसी संस्थाओ कागज के वाघ है, बोलते बहुत है परंतु करते कुछ भी नही, ये सब कायरो की सेना है.
समाचार पढो : शिव सेना का आंतक सायबर काफेवालों पर

poor country rich politician – निर्धन देश के धनवान राजकिय नेता

March 15, 2007

हमारे देश के सामान्य व्यक्ति के लिए सुरक्षा की चिंता सरकार करती नहीं, वो चाहे बम्बं विस्फोट मे मारे जाये कोई बात नहीं परंतु हमारे माथे पे पडे ये राजकिय लोगो की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है.मै और आप बिना सुरक्षा रह सकते है परंतु ये राजकिय के नेता(यानी महाराजा) बिना सुरक्षा नहीं रह सकते है ईसीलिये अंदाजपत्र मे उनके लिए खास प्राथमिकता दी जाती है और ये चोर,लफंगे,लूटेरे यानी कामचोर नेताओ के लिये 2006-2007 में 132.41 करोड रुपिया का खर्च करने के लिये बाँटा गया था.
याने Special Protection Group के लिये जो केन्द्रीय प्रधानो की सुरक्षा करती है उनके लिये 132.41 करोड, ये है हमारे निर्धन भारत के धनवान नेता.
अब यही नेताओ के कहे के यदी आपको सुरक्षा चाहिऎ तो पैसा देना पडेगा तो ये सब नफ्फट हो कर कहेंगे “हमारे पास ईतना पैसा नहीं है और आप हमे सरकारी खर्च पर सुरक्षा प्रदान करो.
मेरे अपना शहर पोरबंदर वैसे छोटा है परंतु यहाँ भी मैने देखा के 27 सुरक्षा कर्मचारी तो राजकिय नेताओ की सुरक्षा मे लगे है उनमे से 4 व्यक्ति के पास तो कोई पद भी नहीं परंतु फिर भी उनको सुरक्षा प्रदान की गई है.
वैसे भी हमारे समाज में आज-कल सुरक्षा कर्मी (सरकार के खर्च पर) रखने की सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतिक बन गया है.
जिस मवाली और गुंडे को सुरक्षा कर्मी ने थाने मे लाकर पीटाई की हों और ये गुंडा चुनाव मे जीत कर आये और जिस सुरक्षा कर्मी ने उसकी पीटाई की थी उसी को उनका सुरक्षा करने के लिये नियुकत की जायें तो उस सुरक्षा कर्मी की परिस्थिती क्या होंगी ?

visit website : भारतीय अंदाज पत्र

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we can’t teach history – हम ईतिहास में से कुछ नही शिखते

October 6, 2006

संसद पर हमला करने के आरोप मे मोहम्मद अफझल को मृत्य दंड दिये जाने पर दंभी-साम्यवादी और दंभी-मानवाधिकार वाले शोर मचाने लगे के; अफझल को मृत्य दंड नही देना चाहिऎ और काश्मिर के सभी मुस्लीम राजनैतिक दल भी शोर मचाने लगे, ये सब देखकर ऎसा लगता है के ईस देश मे आप किसी भी त्रासवादी कृत्य करो आपको सजा नही मीलेगी.
अगर ऎसे ही देश का संचालन करना है तो ईस न्यायलय कि क्या जरुरत ? बंध कर दो सभी न्यायलय और ईस देश को त्रासवादीओ के हवाले कर दो. प्रश्न संसद पर हमले का नही है अगर ईस त्रासवादीओ ने हमला कर के संसद मे बैठे नालायक राजनैतिक सांसदो मार डाला होता तो, हम भी आज यही त्रासवादीयों के समर्थन मे निकलते और कहते के उसकी सजा माफ करो परंतु ईस त्रासवादीयों ने हमारे सुरक्षा बल के नौजवान की हत्या की है और ईसीलीये ईन को मृत्य दंड मिलना चाहिये.
साम्यवादी जो अपने को कहते ह, ईस देश मे ये वास्तव मे साम्यवादी नही है, मैने माओ, लेनिन और चे-गवारा को पढा और देखा के वो लोग बहादुर थे और सही साम्यवादी थे परंतु भारत के साम्यवादी हमेंशा मुस्लीम परस्त और हिन्दु विरोधी रहे है और मुझे तो शंका है के ये साम्यवादी नही है परंतु धर्म-परिवर्तन किये मुस्लीम है और भारत ऎवंम हिन्दुओ को विनाश करने के लिए साम्यवाद का मुखोटा पहेना.
Read More : BBC Hindi

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terrorist

Happy Janmashtami – जनमाष्टमी की शुभकामना

August 16, 2006

lord krishna krishana messeges  

Tonight Lord Krishna Birthday so Happy Janmashtami everyone and fight terrorism.

                       Bhagavad-Gita Messages

1. ARJUN’S DILEMNA
NOTE: The war of Mahaabhaarata has begun after all negotiations by Lord Krisna and others to avoid it failed. The blind King (Dhritaraashtra) was never very sure about the victory of his sons (Kauravas) in spite of their superior army. Sage Vyasa, the author of Mahaabhaarata, wanted to give the blind king the boon of eyesight so that the king could see the horrors of the war for which he was primarily responsible. But the king refused the offer. He did not want to see the horrors of the war; but preferred to get the war report through his charioteer, Sanjaya. Sage Vyasa granted the power of clairvoyance to Sanjaya. With this power Sanjaya could see, hear, and recall the events of the past, present, and the future. He was able to give an instant replay of the eye witness war report to the blind King sitting in the palace.
Bhishma, the mightiest man and the commander-in-chief of the Kaurava’s army, is disabled by Arjuna and is lying on deathbed in the battleground on the tenth day of the eighteen-day war. Upon hearing this bad news from Sanjaya, the blind King looses all hopes for victory of his sons. Now the King wants to know the details of the war from the beginning, including how the mightiest man, and the commander-in-chief of his superior army — who had a boon of dying at his own will — was defeated in the battlefield. The teaching of the Gita begins with the inquiry of the blind King, after Sanjaya described how Bhishma was defeated, as follows:
The King inquired: Sanjaya, please now tell me, in details, what did my people (the Kauravas) and the Pandavas do in the battlefield before the war started? (1.01)
Sanjaya said: O King, After seeing the battle formation of the Pandava’s army, your son approached his guru and spoke these words: (1.02)
O Master, behold this mighty army of the Pandavas, arranged in battle formation by your other talented disciple! There are many great warriors, valiant men, heroes, and mighty archers. (1.03-06)
INTRODUCTION OF THE ARMY COMMANDERS
Also there are many heroes on my side who have risked their lives for me. I shall name few distinguished commanders of my army for your information. He named all the officers of his army, and said: They are armed with various weapons, and are skilled in warfare. (1.07-09)
The army protecting our commander-in-chief is insufficient, where as my archrival on the other side is well protected. Therefore all of you, occupying your respective positions, protect our commander-in-chief. (1.10-11)
WAR STARTS WITH THE BLOWING OF CONCH SHELLS
The mighty commander-in-chief and the eldest man of the dynasty roared as a lion and blew his conch loudly, bringing joy to your son. (1.12)
Soon after that; conches, kettledrums, cymbals, drums, and trumpets were sounded together. The commotion was tremendous. (1.13)
After that, Lord Krsna and Arjuna, seated in a grand chariot yoked with white horses, blew their celestial conches. (1.14)
Krishna blew His conch first, and then Arjuna and all other commanders of various divisions of the army of Pandavas blew their respective conches. The tumultuous uproar, resounding through the earth and sky, tore the hearts of your sons. (1.15-19)
ARJUNA WANTS TO INSPECT THE ARMY AGAINST WHOM HE IS ABOUT TO FIGHT
Seeing your sons standing, and the war about to begin with the hurling of weapons; Arjuna took up his bow and spoke these words to Lord Krsn: O Lord, please stop my chariot between the two armies until I behold those who stand here eager for the battle and with whom I must engage in this act of war. (1.20-22)
I wish to see those who are willing to serve and appease the evil-minded Kauravas by assembling here to fight the battle. (1.23)
Sanjaya said: O King; Lord Krisna, as requested by Arjuna, placed the best of all the chariots in the midst of the two armies facing Arjuna’s grandfather, his guru and all other Kings; and said to Arjuna: Behold these assembled soldiers! (1.24-25)
Arjuna saw his uncles, grandfathers, teachers, maternal uncles, brothers, sons, grandsons, and other comrades in the army. (1.26)
ARJUNA’S DILEMMA
After seeing fathers-in-law, companions, and all his kinsmen standing in the ranks of the two armies, Arjuna was overcome with great compassion and sorrowfully spoke these words: O Krisna, seeing my kinsmen standing with a desire to fight, my limbs fail and my mouth becomes dry. My body quivers and my hairs stand on end. (1.27-29)
The bow slips from my hand, and my skin intensely burns. My head turns, I am unable to stand steady, and O Krisna, I see bad omens. I see no use of killing my kinsmen in battle. (1.30-31)
I desire neither victory, nor pleasure nor kingdom, O Krishna. What is the use of the kingdom, or enjoyment, or even life, O Krishna? Because all those — for whom we desire kingdom, enjoyments, and pleasures — are standing here for the battle, giving up their lives. (1.32-33)
I do not wish to kill my teachers, uncles, sons, grandfathers, maternal uncles, fathers-in-law, grandsons, brothers-in-law, and other relatives who are about to kill us, even for the sovereignty of the three worlds, let alone for this earthly kingdom, O Krsna. (1.34-35)
O Lord Krishna, what pleasure shall we find in killing our cousin brothers? Upon killing these felons we shall incur sin only. (1.36)
Therefore, we should not kill our cousin brothers. How can we be happy after killing our relatives, O Krishna? (1.37)
Though they are blinded by greed, and do not see evil in the destruction of the family, or sin in being treacherous to friends. Why we, who clearly see evil in the destruction of the family, should not think about turning away from this sin, O Krishna? (1.38-39)
ARJUNA DESCRIBES THE EVILS OF WAR
Eternal family traditions and codes of moral conduct are destroyed with the destruction of the family. And immorality prevails in the family due to the destruction of family traditions. (1.40)
And when immorality prevails, O Krishna, the women of the family become corrupted; when women are corrupted, unwanted progeny is born. (1.41)
This brings the family and the slayers of the family to hell, because the spirits of their ancestors are degraded when deprived of ceremonial offerings of love and respect by the unwanted progeny. (1.42)
The everlasting qualities of social order and family traditions of those who destroy their family are ruined by the sinful act of illegitimacy. (1.43)
We have been told, O Krishna, that people whose family traditions are destroyed necessarily dwell in hell for a long time. (1.44)
Alas! We are ready to commit a great sin by striving to slay our relatives because of greed for the pleasures of the kingdom. (1.45)
It would be far better for me if my cousin brothers kill me with their weapons in battle while I am unarmed and unresisting. (1.46)
WHEN GOING GETS TOUGH, EVEN TOUGH ONES CAN GET DELUDED
Sanjaya said: Having said this in the battlefield and casting aside his bow and arrow, Arjuna sat down on the seat of the chariot with his mind overwhelmed with sorrow. (1.47)
It is said Arjuna was put to delusion by the will of Lord Krishna, the God, for the purpose of manifesting the teachings of the Gita meant to enlighten and console bewildered souls.

by : http://www.gita4free.com/english_commentarygita1.html

islma terror- कया करे हम

July 30, 2006

donkeyहमारी निकम्मी ओर कायर सरकार त्रासवादी को तो नष्ट नहीं कर सकती है ईसीलीये जो सच बोलते है और अपनी व्यथा ब्लोग लिख के अपना आक्रोश व्यक्त करती है उनको चुप करने के लिए ब्लोग साईट को बंध करा दिया और ईस्लामीक त्रासवाद को उतेजन देने वाली साईट को बंध नही किया.

जिस व्यक्ति ने कोईम्बुतर मे बम्ब धमाका किया था और अभी तामिलनाडु की जेल मे बंध है वो मदानी को सरकार ने वी.आई.पी. सेवा दी है और उनको मसाज करने के लिये सरकार ने खुद रुपिया 50000 का खर्च किया और ये कोंग्रेस,साम्यवादी,समाजवादी और डी.एम.के जो मुस्लीम मत लेने के लिये कुछ भी कर सकते है,

अभी दो दिन पहले बांग्लादेश के लोगो ने भारत की जमीन पर कब्जा कर लियाऔर हमारा मनमोहन क्या करता है ? बांसुरी बजाता है.

visit site : www.hinduunity.org

http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/1823626.cms

http://www.indianexpress.com/story/9187.html

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mumbai bomb blast & pseudo secularist

July 20, 2006

मुंबई मे बंम
धमाका हुआ और ये दंभी मानवाधिकार वाले ने चर्चा शरु कर दी के दोषीओ को सजा
देनी चाहिऎ परंतु निर्दोष कही फंस न जाये परंतु  निर्दोष कोन है ? ये केसे मुल्यांकन किया जायगाँ ? यही मानवाधिकार वाले जब कीसी अपराधी को सजा
मिलती है अओर जेल मे उस पर थर्ड डीग्री का उपयोग पुलीस वाले करते है तो कौआ की तरह शोर
मचा देते है के उस पर दया रखनी चाहिऎ और उस पर थर्ड डीग्री का उपयोग नही
करना चाहिऎ यानी ये त्रासवादी जो निर्दोष का रकत बहाते उन राक्षसो पर दया
राखनी चाहिऎ., एसे है हमारे दंभी
मानवाधिकार वाले.
एक और दंभी मानवाधिकार का झंडा लेके
शोर मचाती है वो है तिस्ता सेतलवड, ईस औरत हमेंशा हिन्दु विरोधी काम करती है, वो कभी भी जब कोई हिन्दु  की हत्या होती है वहां वो चुप हो जाती है परंतु जब
कोई मुस्लीम मर जायेंगे तो वो शोर मचा देगी अभी हाल मे मुंबई मे बंम धमाका हुआ तो
उसने कहां के :
वर्ष 1992-93 के बाद देश में जो परिस्थितियाँ बनी और
गुजरात में जिस तरह से दंगे हुए उससे समाज का एक तबका मानता है कि उनके
साथ भेदभाव हो रहा है. इसलिए वे भटक रहे हैं.”
ये तीस्ता सेतलवड का ईतिहास कोई
ज्ञान नहीं कयोंके अगर मुस्लीम लोग के साथ भेदभाव रखा जाता तो ये लोग को कब का ईस देश
मे से निकाला जाता और हर दंगे की शरुआत मुस्लीम ही करते है और अगर ईन मे सहनशक्ति
नही है और ये मानते है के हमारे साथ भेदभाव रखा जाता है तो देश छोड कर चला
जाना चाहिए हमने उनको पाकिस्तान दे दीया और हिन्दुओ के साथे तो 1000 वर्ष से भेदभाव रखा गया और लाखो हिन्दुओ की
हत्या कर दी तो हिन्दुओ ने तो कही बंम धमाके नही किया ? और भविष्य मे जब हिन्दु कोई मुस्लीम ऎरीया मे धमाका
करे तो मे आशा रखता हुं के तिस्ताजी अगर सच्चे मानवादिकार की हिमायती है
तो ईस शब्द  को बोलना जो आपने अभी मुंबई चर्चा मे कहा था सिर्फ मुस्लीम शब्द के
बदले हिन्दु बोलना.
यही हमारी हिन्दु जात की मुर्खता  है के
एसे दंभी को जीवीत रखती है.सब को पता है के अबु आजमी जो के समाजवादी का नेता है और हिन्दु विरोधी है उन्होने बयान दिया था के 20 करोड मुस्लीम रास्ते पे आ जायेगेँ और हम भी चाहते है के आप कब रास्ते पे आयें ईसी समय की तो हम राह देख रहे है और ये कोंग्रेस ? जिस के उतर प्रदेश के नेता सलमान खुरशीसद ने तो सीम्मी के लिऎ सुप्रीम कोर्ट मे केस लडा था और सीम्मी की वकालत की थी.एसे है हमारे राजकीय पक्ष जो देश मे जो त्रासवाद को प्रोत्साहित करते है.

समाचार :गुजराती भाषा के वर्तमान
पत्र

* गुजरात मे खतरनाक त्रासवादी संगठ
ने के 5 मोडयुल्स सक्रिय और
गुजरात ने सुचना मुंबई पोलीस को दी थी परंतु मुंबई ने गंभीरता से नही लिया.

* गुजरात मे अब तक सीमी के विरुध्ध 9
केस दाखिल.

* सीमी की तरह ऎम.डी.ऎफ, जुथ सक्रिय.

*उतर प्रदेश पाकिस्तान की जासुसी संस्था के लिऎ स्वर्ग समान है

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